महिला सशक्तिकरणः आदि भी आरंभ भी, यत्र नारी पूज्यते, तत्र देवता रमन्ते

यत्र नारी पूज्यते, तत्र देवता रमन्ते। अर्थवेद से लिया गया ये श्लोक नारी के मान, सम्मान और प्रतिष्ठा को सिद्ध करता है। श्लोक में साफ तौर पर कहा गया है कि जहां नारी की पूजा होती है, उनका सम्मान किया जाता है, वहां यश, वैभव और सम्मान बढ़ता है। भारत में आदिकाल से नारी को देवी के रूप में पूजा जाता है, लेकिन विदेशी आक्रामण बढ़ने के बाद नारियों के सम्मान और उनकी मर्यादा में कमी आई है।

कुप्रथाओं का अंत

आदिकाल से पूजी जा रही नारियों के सम्मान में उस वक्त कमी देखी गई जब विदेशी आक्रमण भारत पर शुरू हुए। विदेशी आक्रमणकारी राज्य जीतने के बाद वहां की स्त्रियों की दुर्गति करते थे, जिसके बाद औरतें मजबूरन जौहर, खुदकुशी का रास्ता अपना लेती थी, जो ये सब करने में असमर्थ होती थी उन्हें दासी बनाकर रखा जाता था।

इस सभी को देखते हुए, औरतें के विवाह बाल्यकाल में होना शुरु हुए जो बाद में बाल-विवाह जैसी कुप्रथा बनकर समाज को दूषित करने लगे, सती प्रथा भी इसी बात का उदाहरण है।

समाज के इन कुकृत्यों को देखकर देश में पहली बार महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम करने का श्रेय राजा राम मोहन राय को जाता है। इन्होंने ऐसी प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाई, जिसके बाद समाज के तमाम लोग इस लड़ाई में साथ आए और देश की आजादी के बाद ऐसी प्रथाओं के खिलाफ सख्त कानून बनाया गया।

महिलाओं को मिला सम्मान

देश आजाद हो चुका था, लेकिन महिलाएं अभी भी पूरी तरह आजाद नहीं थी। कारण था उनके पास अल्पज्ञान, अभी भी लड़कियों को घर से बाहर निकलने की अनुमित नहीं थी। समाज में पुरुषों को दबदबा अभी भी बरकरार था। लेकिन समय बीतता गया और सरकार के कठिन प्रयासों से महिलाओं को आजादी मिलनी शुरु हुई, वे समाज से बाहर निकली, पढ़ाई की और देश का नाम रोशन करना शुरु किया।

महिलाओं ने बढ़ाई देश की शान

कल्पना चावला, बछेंद्री पाल, सरोजनी नायडू जैसी महिलाओं ने देश की दूसरी महिलाओं के सामने उदाहरण पेश करते हुए उनकी आइडल बनकर उभरी। देश को इंदिरा जैसी नारी का नेतृत्व प्राप्त हुआ। तब जाकर देश को समझ आया कि औरतें अगर घर चला सकती है तो देश भी बाखूबी चला सकती है।

आज के समय में महिलाएं देश के हर क्षेत्र में अपना कौशल दिखा रही हैं। चाहे वो विज्ञान का क्षेत्र हो, युद्ध का मैदान हो, या फिर चिकित्सा का क्षेत्र, महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों को पीछे छोड़ रही है। धरती से लेकर अतरिंक्ष तक महिलाओं ने अपना परचम स्थापित किया हुआ है। सरकार आज भी महिलाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर उनका हौसला अफजाई कर रही है। आज सचमुच अर्थवेद का श्लोक सत्य साबित हो रहा है। यत्र नारी पूज्यते, तत्र देवता रमन्ते।

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