बिहार में राजनीति की नई लहर,महिला प्रधान एवं युवा राजनीति की शुरुआत :

आज के युग में महिलाएँ पुरुष प्रधानता का भ्रम तोड़ हर क्षेत्र में उभर कर सामने आ रही हैं। चाहे वह घर से बाहर निकल कर नौकरी करना  हो या खेल में शिरकत करना। महिलाओं ने हर कदम पर खुद को बेहतर साबित किया हैं। देश में महिलाओं की 49 प्रतिशत आबादी होने के बाद भी महिलाओं की राजनीति में हिस्सेदारी न के बराबर हैं।

घरेलू जिम्मेदारियां, समाज में महिलाओं की भूमिकाओं के बारे में सांस्कृतिक दृष्टिकोण और परिवार से समर्थन की कमी जैसे मुख्य कारणों की वजह से महिलाओं को राजनीति में प्रवेश करने से रोका जाता हैं।

इन रूढ़िबद्ध धारणाओं को तोड़ कर बिहार की पुष्पम प्रिया चौधरी ने अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन एक पार्टी की शुरुआत की घोषणा की जिसका नाम हैं ” Plurals” तथा साथ में ही उन्होने आने वाले असेंबली चुनाव में मुख्यमंत्री पद के लिए खड़े होने का तथा चुनाव लड़ने के  विषय में जानकारी दी।

प्लूरल्स पार्टी के मुख्य उद्देश्य :

दल को सबसे प्रगतिशील दल बताते हुए पार्टी के पोस्टर में लिखा गया “लव बिहार,हेट पॉलिटिक्स?” तथा पार्टी का प्रचार करतें हुए इस बात पर जोर दिया गया कि  ” बिहार बेहतर का हकदार है, और यह बेहतर संभव है। ” पुष्पम ने यह भी कहा की अगर उन्हें मुख्यमंत्री के रूप मेरा चुना गया तो वह 2025 तक बिहार को भारत का सबसे अधिक विकसित राज्य बनाएंगी तथा 2030 तक विकास की दर यूरोपियन देशो को भी पार कर जाएगी ।

इस पार्टी ने एक मुहिम चलाई हैं जिसका नाम हैं :

#Let’sOpenBihar #30YearsLockdown…इसके अंतर्गत पार्टी ने इस बात पर ध्यान दिलाया की राज्य पिछ्ले 30 साल से अर्थिक लॉकडाउन को झेल रहा हैं। उद्योग धन्धो पर खास रूप से ध्यान नहीं दिया गया हैं जिस कारण कई लोगों को काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जाना पड़ता हैं। उन्होंने इस बात की ओर ध्यान दिलाते हुए जनता को विश्वास दिलाया कि अगर वो सत्ता में आई तो 2020-30 का युग सम्पूर्ण बदलाव का युग होगा। पिछले 30 सालों से बर्बाद किए गए पारंपरिक उद्योगों को फ़िर से उठाने के लिए यह पार्टी कार्य करेगी।

पार्टी ने सकारात्मक राजनीति के मार्ग पर काम करने की बात कही हैं तथा उम्मीदवार परंपरागत राजनीति से जुड़े मुद्दे जैसे ’सोशल जस्टिस’, सोशल इंजीनियरिंग ’और समावेशी विकास’ पर ध्यान न देकर वह दूसरे मुद्दों को उठा रहीं हैं।

वह सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी -2030) के बारे में बात करती है और चाहती है कि लोग विशेष रूप से युवा पीढ़ी राजनीति को नियंत्रित करें।  एलएसई और आईडीएस में उनके अध्ययन और बिहार में उनके अनुभवों के आधार पर उनकी विकास रणनीति, कई वास्तविकताओं को एकीकृत कर रही है क्योंकि विकास का एक भी मॉडल नहीं हो सकता हैं।

“बिहार को गति चाहिए, बिहार को पंख चाहिए, बिहार को बदलाव चाहिए।  क्योंकि बिहार बहुत बेहतर का हकदार है। बकवास राजनीति को नकारें, बिहार को चलाने और 2020 में उड़ान भरने के लिए प्लुरल्स में शामिल हों। उन्होंने विज्ञापन के माध्यम से इस बात पर जोर डाला।

पुष्पम प्रिया चौधरी की पारिवारिक पृष्ठभूमि 

पुष्पम जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व नेता विनोद कुमार चौधरी की बेटी हैं।  विनोद मूल रूप से दरभंगा के लहेरियासराय के रहने वाले हैं और दो दशकों से पत्रकार हैं।  उनके पिता, उमाकांत चौधरी, एक ब्राह्मण, समता पार्टी के दिनों में नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी थे।

शैक्षिक पृष्ठभूमि 

पुष्पम ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा दरभंगा होली क्रॉस मिशनरी स्कूल से की हैं तथा स्नातक पुणे से की हैं। अपनी आगे की पढ़ाई उन्होने लंदन से पूरी की हैं। सन् 2016 में उन्होने डेवलपमेंटल स्टडीस में सूसेक्स विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया हैं तथा सन् 2019 में लंदन स्कूल ऑफ़ एकनॉमिक्स से पब्लिक ऐडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स किया हैं।

बिहार में नई सोच के साथ युवा राजनीति का उद्भव

इस पार्टी के बनने से बिहार में युवा राजनीति का आगमन देखने को मिलेगा तथा युवाओं की आशाओं व काम के तरीके के विषय में भी पता चलेगा। राजनीतिक विश्लेषक महेंद्र सुमन कहते हैं कि “वर्तमान में, बिहार में राजनीति के शीर्ष पर सभी नेता 1974 के आंदोलन के एक उत्पाद हैं।  वे खुद बिहार में युवा पीढ़ी के लिए जगह बनाने के पक्ष में हैं, जबकि बाद वाले उस स्थान को पुनः प्राप्त कर रहे हैं। पुष्पम उनमें से एक है। युवाओं की महत्वाकांक्षाएं हैं। इस बारे में कुछ भी गलत नहीं है। ”

वह राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान और भाकपा नेता कन्हैया कुमार जैसे बिहार के नेताओं की युवा ब्रिगेड के लिए ख़तरा हैं जो पारिवारिक अनुरूपता का शिकार हैं।

नकारात्मकता की कमी नहीं

राज्य के कई नेता जिनमें उनके चाचा भी शामिल हैं, पुष्पम प्रिया चौधरी के कदम को बचकाना मानते हैं। एक जनता दल (यूनाइटेड) के नेता ने कहा कि, ,”उन्हें बिहार में कन्हैया कुमार और तेजस्वी यादव जैसे राजनेताओं की युवा ब्रिगेड में शामिल होना चाहिए, जो अभी भी अपनी पहचान बनाने के लिए नारे लगा रहे हैं।  जाति-ग्रस्त समाज को बदलना बहुत मुश्किल है। AAP ने 2014 में बिहार की राजनीति में नई हवा लाने की कोशिश की और इसके उम्मीदवार बुरी तरह से विफल रहे।”

जद(यू) के एक मंत्री ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “अगर वह सीएम हो सकती हैं, तो आप भी कर सकते हैं”, उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने उनकी चुनौती को गंभीरता से लेने से इनकार कर दिया।

पुष्पम के चाचा अजय चौधरी, जो दरभंगा में जद (यू) के जिला अध्यक्ष हैं, उनके राजनीतिक परिदृश्य पर आने से ज्यादा उत्साहित नहीं दिखे । उनके अनुसार यह एक हंसी का दावा हैं क्योंकि बिहार के लोग चाहते हैं कि नीतीश कुमार अगले 15 सालों तक सीएम रहें। ”

यह एक गर्व की बात हैं कि इस बिहार की लड़की ने राज्य की मौजूदा स्थिति के खिलाफ आवाज़ उठाने की कोशिश की तथा राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का उदाहरण सामने रखा।

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