दिल्ली हिंसा: सफूरा जरगर की जमानत याचिका पर, हाई कोर्ट ने पुलिस से मांगा स्टेटस रिपोर्ट

 

दिल्ली उच्च न्यायालय ने, गुरुवार को दिल्ली पुलिस को, आतंकवाद विरोधी कानून के तहत गिरफ्तार, जामिया कोऑर्डिनेशन समिति की सदस्य सफूरा जरगर की जमानत याचिका पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है।

इसी वर्ष फरवरी माह में दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने 10 अप्रैल को सफूरा को गिरफ्तार किया था। सफूरा जरगर को गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया था। सफूरा जरगर अभी तिहाड़ जेल में बंद हैं।

दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की एम फिल की छात्रा सफूरा जरगर चार महीने से अधिक की गर्भवती भी है।

न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने पुलिस को नोटिस जारी किया और जमानत याचिका पर स्थिति रिपोर्ट दायर करने को कहा है। उच्च न्यायालय ने अभी मामले को 22 जून को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

10 अप्रैल को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार की गई जरगर की जमानत याचिका को निचली अदालत ने खारिज कर दिया था और उसने अपने आदेश में कहा था, की “जब आप अंगारे के साथ खेलना चुनते हैं, तो आप चिंगारी से आग फैलने के लिए हवा को दोष नहीं दे सकते हैं।

निचली अदालत ने कहा था कि जांच के दौरान एक बड़ी साजिश का पता चला है और अगर किसी साजिशकर्ता द्वारा किए गए षड्यंत्र, कृत्यों और बयानों के सबूत हैं तो यह सभी के खिलाफ स्वीकार्य है। अदालत ने जरगर को पूरी चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए भी कहा था। निचली अदालत के फैसले के बाद जरगर ने हाई कोर्ट में जमानत याचिका की जिसमे अदालत ने फिलहाल पुलिस जरगर की स्टेटस रिपोर्ट देने को कहा है।

पुलिस ने पहले दावा किया था कि सफूरा ज़गर ने कथित रूप से सीएए के विरोध प्रदर्शनों के दौरान जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास एक सड़क को जाम कर दिया था और लोगों को उकसाया जिससे इलाके में दंगे हुए थे। पुलिस की स्पेशल सेल ने कहा सफूरा ने दंगा फैलाने के मकसद से भड़काऊ भाषण दिया था और इसके लिए पहले से तैयारी की गई थी। इस कारण सफूरा जरगर को यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस ने आगे दावा किया कि सफूूूरा जरगर फरवरी में पूर्वोत्तर दिल्ली में सांप्रदायिक दंगों को उकसाने के लिए “पूर्ववर्ती साजिश” का कथित रूप से हिस्सा थी।
नागरिकता कानून समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी को पूर्वोत्तर दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं, जिसमें कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे।

 

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