उड़ीसा के महानदी में मिला 500 वर्ष पुराना प्राचीन मंदिर, 1933 की बाढ़ में हो गया था जलमग्न

इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) की पुरातत्व सर्वेक्षण टीम ने हाल ही में दावा किया कि उन्होंने कटक से महानदी में एक प्राचीन जलमग्न मंदिर की खोज की है।

ओडिशा के नयागढ़ में एक प्राचीन मंदिर मिला है जो महानदी नदी में डूबा हुआ था। माना जाता है कि यह मंदिर 1933 में आई बाढ़ के दौरान लगभग 450 से 500 साल पुराना था। नदी घाटी में मौजूद ऐतिहासिक विरासत का दस्तावेजीकरण कर रहे एक्सपर्ट्स ने यह जानकारी दी है। और अब मंदिर के पास भारी संख्या में लोगो की भीड़ भी उमड़ने लगी है।

इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) की पुरातत्व सर्वेक्षण टीम ने हाल ही में दावा किया है कि उन्होंने कटक से महानदी में एक प्राचीन जलमग्न मंदिर की खोज की है।

जलमग्न मंदिर की चोटी का पता नायागढ़ के पास पद्मावती गांव में बागेश्वर के पास नदी के बीच में लगाया गया था। मस्तका की निर्माण शैली और निर्माण के लिए उपयोग की जाने वाली सामग्री पर विचार करते हुए पता चलता है कि, 55 से 60 फीट जलमग्न मंदिर को 15 वीं शताब्दी के अंत या 16 वीं शताब्दी की शुरुआत में बनाया गया है।

एक ग्रामीण ने कहा कि “मंदिर बहुत समय पहले जलमग्न हो गया था, लेकिन लगभग 11 साल पहले, मंदिर फिर से उभरने लगा और दिखाई देने लगा। अब मंदिर जल स्तर से थोड़ा ऊपर दिखाई दे रहा है।

INTACH चीफ अनिल कुमार धीर के अनुसार, 55 से 60 फीट लंबा मंदिर जो भगवान गोपीनाथ का है, जो भगवान विष्णु का ही एक रूप हैं। यह मंदिर 15 वीं शताब्दी के अंत या 16 वीं सदी के शुरुवात का है।

“इस मंदिर का बहुत पुराना इतिहास है। यह मंदिर 450 से 500 वर्ष पुराना है। इस मंदिर से भगवान की मूर्ति को दूसरे मंदिर में ले जाया गया है। हमे लगभग एक सप्ताह पहले हमें सूचित किया गया था कि मंदिर की ऊपरी सतह दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा यह मंदिर संरक्षण की अच्छी स्थिति में है। मंदिर को फिर से स्थापित किया जाना चाहिए क्योंकि हमारे पास तकनीक है। यह पहला जलमग्न मंदिर नहीं है जिसे हमारे द्वारा बरामद किया गया है।

जिस क्षेत्र में मंदिर पाया गया है उसे ‘सतपतन’ माना जाता है। पद्माबती गांव सातपटाना का हिस्सा था जो सात गांवों का मेल है। मंदिर भगवान गोपीनाथ देव को समर्पित था।

150 साल पहले इस गांव में भयानक बाढ़ आई थी और इसे कारण 1933 में बाढ़ के दौरान पूरा गांव नदी में डूब गया था और साथ में मंदिर भी नदी में समा गया था।अनिल कुमार धीर ने कहा, क्षेत्र में लगभग 65 मंदिर हैं जो पानी के भीतर हैं लेकिन सिर्फ गोपीनाथ देबा मंदिर का  ‘मस्तका’ कुछ वर्षों से दिखाई दे रहा है क्योंकि यह सबसे लंबा मंदिर था।

 

 

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