मध्य प्रदेश पुलिस ने वकील की पिटाई करने के लिए माफी मांगते हुए कारण बताया कि ” वी थॉट यू वर मुस्लिम ”

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दीपक बुंदेले जो पेशे से एक वकील एवं पूर्व पत्रकार हैं, उन पर 23 मार्च को मध्य प्रदेश के बैतूल पुलिस द्वारा बेरहमी से हमला किया गया था, बैतूल जिले के कोतवाली पुलिस स्टेशन के एक सहायक उप-निरीक्षक बीएस पटेल ने उनका बयान दर्ज करने के लिए पीड़ित से संपर्क किया।  हालांकि, उन्होंने कथित तौर पर बुंदेले को यह कहते हुए केस वापस लेने के लिए कहा कि पुलिस ने उन्हें मुस्लिम समझ लिया क्योंकि उनकी लंबी दाढ़ी थी और उनके साथ इस कारण मारपीट की। लेकिन, पुलिस ने कहा, वे इस बात से शर्मिंदा हैं कि उन्होंने अपने ‘हिंदू भाई’ को पीटा था। ‘

 देश भर में लॉकडाउन की घोषणा से एक दिन पहले बुंदेले सरकारी अस्पताल में डाएबिटीज़ के इलाज के लिए जा रहे थे, तब उन पर हमला हुआ। बहुत कोशिशों के बाद भी जिला पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया जिसके पश्चात उन्होंने राज्य मानवाधिकार आयोग,मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश,मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, विवेक जौहरी, पुलिस महानिदेशक को मध्य प्रदेश के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा ।

COVID-19 महामारी के प्रकोप के कारण बैतूल जिले में धारा 144 लागू कर दी गई थी और घटना के घटित होने के बाद लोगो के बहर निकलने को प्रतिबंधित कर दिया गया था।

घटना के लगभग 2 महीनो बाद बुंदेले ने एक ऑडियो साझा की जिसमें वह ASI पटेल से बात कर रहें हैं। ASI पटेल ने कहा, “हम उन अधिकारियों की ओर से माफी मांगते हैं, जिन्होंने मारपीट की।  घटना के कारण हम वास्तव में शर्मिंदा हैं। यदि आप चाहें, तो मैं उन अधिकारियों को ला सकता हूं और उन्हें आपसे व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने को कह सकता हूं। उन्होंने आपको एक मुसलमान समझा और आप पर हमला किया, क्योंकि आपकी लंबी दाढ़ी थी।  और वह आदमी जिसने आपके साथ मारपीट की एक कट्टर हिंदू है … हिंदू-मुस्लिम दंगों में जब भी किसी मुसलमान को गिरफ्तार किया जाता है, तो वे हमेशा उन्हें बेरहमी से पीटते हैं । “

14 मिनट के लंबे ऑडियो में, उन्होंने आगे कहा, “मैं आपसे शिकायत वापस लेने का अनुरोध करता हूं।  कृपया हमारे अनुरोध को स्वीकार कर लिजिए ।” सिपाही ने कहा, “उन सभी लोगों को शर्म आ रही हैं कि उन्होंने पहचान के बिना एक हिंदू भाई के साथ ऐसा कुछ किया।  हमें आपसे कोई दुश्मनी नहीं है। जब भी कोई हिंदू-मुस्लिम दंगा होता है, पुलिस हमेशा हिंदुओं का समर्थन करती है; मुसलमानों को भी यह पता है। लेकिन जो कुछ भी आपके साथ हुआ वह अज्ञानता के कारण हुआ।  उसके लिए मेरे पास कोई शब्द नहीं है। ”

ASI  पटेल के दावे का खंडन करते हुए, बुंदेले ने दावा किया कि उस दिन कोई हिंदू-मुस्लिम दंगा नहीं हुआ था और जब मैंने लगातार शिकायत को वापस लेने से इनकार कर दिया, तो उन्होंने मुझे अप्रत्यक्ष रूप से धमकी देते हुए कहा, ‘हमारे अनुरोध पर सहमत हो जाओ , अन्यथा आप और आपके वकील इसका  परिणाम भुगतेंगे ।”

संपर्क करने पर बैतूल के एसपी डीएस भदौरिया ने कहा, “मुझे इस ऑडियो क्लिप की कोई जानकारी नहीं है।  अगर मुझे ऐसी कोई शिकायत मिलती है तो मैं सख्त कार्रवाई करूंगा। 

बता दें, यह घटना  23 मार्च की शाम की हैं  जब बुंदेले इलाज के लिए अस्पताल जा रहे थे, तब बैतूल पुलिस ने कथित तौर पर उनकी पिटाई कर दी।  32 वर्षीय वकील ने लगभग एक दशक तक मध्य प्रदेश की राज्य की राजधानी में विभिन्न दैनिक समाचार पत्रों के लिए एक पत्रकार के रूप में काम किया हैं ।  वह 2017 में बैतूल चले गए और अपने भाई के साथ जिला अदालत में प्रैक्टिस शुरू कर दी। उन्होनें बताया कि “मैं पिछले 15 वर्षों से मधुमेह और ब्लड प्रेशर का रोगी हूँ। 23 मार्च को, चूंकि मेरी तबियत ठीक नहीं थी, इसलिए मैं अस्पताल के लिए निकला परंतु  पुलिस ने मुझे बीच में ही रोक दिया।

वकील ने कहा कि ” उन्होंने पुलिस कर्मियों को समझाया कि उन्हें अपनी दवाइयां लेनी हैं, लेकिन उनमें से एक ने उन्हें थप्पड़ मार दिया तथा उनकी बात को सुनने की कोशिश तक नहीं की।  जब मैंने विरोध किया और कहा कि पुलिस को जनता को पीटने का कोई अधिकार नहीं है, तो कुछ ही समय के भीतर, कई पुलिस अधिकारी आए और मुझे लाठी से पीटना शुरू कर दिया,मेरे गिरने के बाद भी वे मुझे मारते रहे।”  

बुंदेले, कई चोटों के बाद भी हिम्मत नहीं हारे तथा घटना के लगभग दो दिन बाद तक उनके कान से खून बहता रहा, लेकिन बैतूल पुलिस ने इस घटना की FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया।

बुंदेले ने कहा, “घटना के दो महीने बाद भी, कोई FIR दर्ज नहीं की गई है और ऐसा लगता है कि पुलिस मामले को छिपाने की कोशिश कर रही है,” मैंने सुप्रीम कोर्ट के वयोवृद्ध वकील विवेक तन्खा और एतमाद हाशमी से बात की हैं और मैं इस मामले को अदालत में ले कर जाऊँगा । ”

 उन्होंने घटना के सांप्रदायिक कोण के बारे में भी गंभीर चिंता जताते हुए कहा, “यह गंभीर चिंता का विषय है कि पुलिस सांप्रदायिक मोड़ ले रही है और एक विशेष समुदाय को अपना निशाना बना रही है।”

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