तेलंगाना में परिवहन की कोई उम्मीद नहीं होने के कारण प्रवासी मज़दूर पैदल ही अपने घर की ओर जाने को मज़बूर

Pic Credit :ANI

कोरोनोवायरस के चलते पूरे भारत में लॉकडाउन की स्थिति हैं जिसके कारण परिवहन की कोई उम्मीद नहीं होने की वजह से हजारों संकटग्रस्त प्रवासियों को शुक्रवार को अपने मूल स्थानों की ओर पैदल जाते हुए देखा गया।

ANI से बात करते हुए छोटू कुमार यादव ने कहा कि, “हम ताण्डूर से आए हैं तथा हम उत्तर प्रदेश और बिहार में अपने घरों की ओर पैदल जा रहे हैं। दो महीने हो गए हैं हमें सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिली है तथा सरकार ने हमें एक किलोग्राम गेहूं तक नहीं दिया हैं । “

उन्होंने आगे अपनी बात रखते हुए कहा कि “अगर कोई हमें परिवहन में मदद करता है तो हम अपने गांव तक पहुंच सकते हैं।” एक अन्य प्रवासी नीलम ने कहा, “हम ताण्डूर से यहां तक आएं हैं, हमें अपने दो छोटे बच्चों के साथ पैदल ही चलना पड़ा। हमें न तो जमींदार और न ही अधिकारियों की ओर से कोई मदद की उम्मीद मिली , इसलिए हमने खुद अपने घर जाने का फैसला लिया हैं। हमें रायचूर पहुंचना है। ”

अफसर अली ने ANI से बातचीत करते हुए कहा कि, “हमारे पास अपने मूल स्थान तक पहुंचने के लिए कोई सुविधा नहीं है, हमने रेलवे विभाग में एक फॉर्म भर दिया है, लेकिन अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है। मेरी पत्नी गर्भवती है, यहां तक ​​कि वह अब परेशानी का भी सामना कर रही है, उसके लिए भी कोई सुविधा नहीं है अब हम एक ऑटो से राजमार्ग तक पहुँच गए हैं तथा ट्रक की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन कोई उम्मीद नहीं बची है। हमें अब यहां से पैदल चलना होगा। ” 

एक अन्य प्रवासी मेवालाल ने ANI से बातचीत करते हुए कहा कि, “मैं अनंतपुर से हैदराबाद तक पैदल आया हूँ, हम यहाँ कुछ देर आराम करने के लिए रुके हैं। शायद हम अगले तीन दिनों में अपने गाँव पहुँच जाएँगे। “

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