“4 सालों में पलायन रोकने वाली नीतीश सरकार अब अपने ही प्रवासी मजदूरों को सीमा में घुसने क्यों नहीं दे रही है?”: जयंत जिज्ञासु

सोमवार को द हिंदी मेल से बात करते हुए जेएनयू के रिसर्च स्कॉलर और आरजेडी लीडर जयंत जिज्ञासु ने नीतीश सरकार की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह सरकार 15 सालों में पूरी तरह से विफल रही है। इन्होंने इन 15 सालों में श्री लालू यादव और राबड़ी जी को कोसने के अलावा कोई और काम नहीं किया है।

कोरोना काल में नीतीश सरकार की कार्यशैली को निराशाजनक बताया

द हिंदी मेल द्वारा आयोजित एक फेसबुक लाइव में, जिसका मुद्दा नीतीश सरकार की कोरोना काल में कार्यशैली और आने वाला बिहार चुनाव था, उसमें जयंत जिज्ञासु ने कई सारी बातें कहीं। उन्होंने बताया कि किस तरह बिहार सरकार बाकी राज्य सरकारों की अपेक्षा में कोरोना महामारी को रोकने में और उससे पीड़ित लोगों के लिए प्रबंध करने में पूरी तरह फिसड्डी रही। उन्होंने इस सरकार की कार्यशैली में कई सारी खामियां उजागर की और इस बात पर जोर दिया कि आने वाले चुनाव में इस सरकार को दोबारा मौका नहीं दिया जाना चाहिए।

प्रवासी मजदूरों के घर वापसी को लेकर नीतीश सरकार के रवैया को उन्होंने बेहद ही संवेदनहीन बताया। उन्होंने कहा, “जहां एक तरफ सभी राज्य सरकारें अपने राज्य से बाहर फंसे लोगों के लिए बसों और ट्रेन का इंतजाम कर रहीं थीं, वहीं नीतीश कुमार पुलिस महकमे के जरिए आदेश देने में व्यस्त थे कि किसी को भी बिहार की सीमा में घुसने नहीं दिया जाएगा।”

"कोरोना काल में नीतीश नीत सरकार की कार्यशैली और आने वाला विधानसभा चुनाव" पर चर्चा करते जेएनयू के रिसर्च स्कॉलर व आरजेडी लीडर जयन्त जिज्ञासु

Posted by The Hindi Mail – द हिंदी मेल on Monday, June 29, 2020

उन्होंने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की लचरता को उजागर करते हुए बताया कि किस तरह बिहार सरकार इलाज ढंग से नहीं कर पा रही है और टेस्ट के आंकड़े भी छुपा रही है। डॉक्टर उनसे मरीजों के इलाज के लिए उपकरण की मांग कर रहे हैं और वह उन्हें किट तक मुहैया नहीं करा पा रहे हैं। वो बोले, “प्रखंड स्तर के अस्पतालों की बात तो छोड़ दें, जिला के सदर अस्पतालों में भी प्रबंध के नाम पर बेड भी नहीं है।”
उन्होंने इसमें जोड़ते हुए कहा, “ऐसा नहीं है कि इस महामारी के कारण बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है बल्कि इस महामारी ने बिहार की पहले से लचर स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति को सबके सामने लाकर रख दिया।”

नीतीश सरकार की हर मोर्चे पर विफलता को उजागर किया

इसके अलावा जयंत ने लगभग हर मोर्चे पर विफल रही नीतीश सरकार को जमकर लताड़ा। उन्होंने बताया कि सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था ही नहीं, राज्य में शिक्षा व्यवस्था, सड़क व्यवस्था, महिलाओं के खिलाफ अपराध, कानून व्यवस्था, रोजगार और कई ऐसे मुद्दे हैं जो एक राज्य के शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से चलने में अहम भूमिका निभाते हैं, नीतीश सरकार ने उन मुद्दों को दरकिनार करते हुए इन 15 सालों में लालू जी और राबड़ी जी को कोसा है और योजनाओं के नाम पर सिर्फ स्कैम किए हैं। उन्होंने बताया कि इस लॉकडाउन काल में भी कानून व्यवस्था बिल्कुल लचर रही है। इन 4 महीनों में ही 404 दुष्कर्म और 874 मर्डर के मामले सामने आ चुके हैं जो कि बेहद ही चिंताजनक हैं।

पलायन के मुद्दे पर विशेष जोर देते हुए जयंत ने कहा कि जब नीतीश सरकार सत्ता में आने के लिए वादे कर रहे थे तो वह कह रहे थे कि उनके आते ही 4 महीने में वह पलायन रोक देंगे। लेकिन अब जब किसी कारणवश लोग अपने राज्य लौटना चाहते हैं तो नीतीश सरकार उन्हें अपने सीमा में नहीं घुसने देते हैं और उन पर आरोप लगाते हैं कि उनके वापस आने से राज्य में कानून व्यवस्था और भी बिगड़ जाएगी।

आने वाले चुनाव में लोगों से मुद्दे पर वोट देने की अपील की

आने वाले बिहार चुनाव को लेकर जयंत का कहना था कि नीतीश कुमार किसी तरह से सत्ता में बने रहना चाहते हैं इसके लिए वह किसी हद तक चले जाते हैं। उन्होंने नीतीश सरकार और उनके साथी भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्होंने इन 15 सालों में काम किया है तो वह जनता के बीच इसकी बात करें और अपने काम पर वोट मांगे। उन्होंने जनता से अपील भी की कि लोकतंत्र में सरकारों का बदलना बहुत जरूरी होता है और इसलिए लोग सोच समझकर इस बार वोट दें। काम के मुद्दे हो तो उन्हीं पर ध्यान दें, जातिवाद और ऐसे बहकावों में ना आएं।

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