छोटी कंपनी बड़ा घोटाला जानिए #BikeBot के बारे में

#Covid19 ने जहा देश और दुनिया में हलचल मचा राखी है वही दूसरी और हम सबने ऐसी समस्याओँ को नजर अंदाज करने लगे है जो कुछ समय तक हमारे दिन चरिया का हिस्सा थी। कुछ ऐसी खबरे जो बुहत जयादा गंभीर और पेचीदा ह।

आज कुछ ऐसी ही एक खबर की बात करेंगे यह बात सुरु हुई थी ३ साल पहले जब एक छोटीसी कंपनी ने इतना बड़ा घोटाला करर दिया की सरकार और पुलिस दोनों को उस कंपनी के मालिक को पकड़ने में ३ साल का समय लग गया।

हम बात कर रहे “Bike Bot ” नामक एक कंपनी की जिस ने अपने निवेश करताओ को 1400 करोड़ का चुना लगा दिया था। बाइक बोट गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड कंपनी ने सात राज्यों के करीब सवा दो लाख लोगों को चपत लगा दी। गर्वित इनोवेटिव प्रोमान्टूक्स नामक इस कंपनी के मालिक थे सजाय भाटी को गोतम बुद्ध नगर में बसपा के नीता थे और उनके 50 साथी।

कहानी शुरू होती है 2018 में जब इस घोटाले का भांडा फोड़ #Zee मीडिया ने करा , उस रिपोर्ट में में बतया गया की कैसे संजय भाटी और उसके 50 साथियो ने 7 शहरों के 2 लाख से भी जयादा लोगो को चुना लगा के फर्रा हूँ गए।

क्या थी यह “Bike Bot ” का पूरा मामला ?


Bike Bot ” एक ऐसी संस्था थी जिसने आम लोगो को सपने दिखाए लाखपति बनने के। “Bike Bot ” में आप पैसे दे के या “Investment ” के रूप में एक Bike खरीदते है और कंपनी उस bike को टैक्सी के रूप में चलाएगी। इस कंपनी में आप 62 , १०० रुपयों की एक इन्वेस्टमेंट करते हो और कंपनी मुनाफे के साथ आपको एप पैसे वापस करने का वादा करती थी इस्सके साथ ही 9785 रुपये का हर महीने एक रेतुर्न के तूर पर देगी। पर ऐसा नहीं हुआ।


एक कर्मचारी तरुण शर्मा की मने तो उसे “अपॉइंटमेंट लेटर ” नहीं नहीं दिया गया था वह ड्राइवरों की नियुक्ति, मोबाइल एप्लिकेशन बनाना , बाइक के ऑनलाइन संचालन और ग्राहक देखभाल सेवाये और “सीईओ” के रूप में इस योजना के विपणन के प्रावधान में शामिल था । उसे सेक्टर 49 के इलाके में दबोचा गया था।
गौतमबुद्धनगर पुलिस के मीडिया सेल के एक बयान में कहा गया है, “वह तीन प्रमुख विमानन सेवा प्रदाताओं के प्रबंधन के साथ-साथ एक विमानन परामर्श सेवा के सलाहकार के रूप में भी काम कर रहा था , और 2018 से गार्विट के सीईओ के रूप में शर्मा को वेतन मिल रहा था। 80,000 प्रति माह, यह जोड़ा गया।
आर्थिक अपराध शाखा के निरीक्षक शैलेश कुमार ने कहा कि जांच के दौरान तरुण का नाम सामने आया, कुछ शिकायतकर्ताओं ने उन्हें बाइक के परिचालन के समग्र प्रभारी के रूप में नामित किया। बाइक बॉट योजना कंपनी द्वारा मंगाई गई थी और इसने हजारों निवेशकों को आकर्षित किया और निवेश के रूप में लगभग 2,000 करोड़ रुपये एकत्र किए। इससे पहले, पुलिस ने फर्म के मालिक संजय भाटी को गिरफ्तार किया था और उसके बाद तीन निदेशकों और एक संपर्क अधिकारी की गिरफ्तारी हुई थी।
5 और 6 अगस्त 2019 को तीन अतिरिक्त निदेशकों को गिरफ्तार किया गया था।
इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय ने कुछ शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए हैं। जांच से जुड़े एक सूत्र ने बताया, “ईडी ने मामले में फरार कुछ निदेशकों को भी समन भेजा है।”
उनमे से कुछ नाम आप निचे फोटो में देख सकते है।

राजेश भारद्वाज, बुलंदशहर के खुर्जा के मूल निवासी हैं। वह योजना की मूल कंपनी गरविट इनोवेटर्स प्राइवेट लिमिटेड (जीआईपीएल) के निदेशकों में से एक थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपी को 14 अगस्त 2019 की शाम नोएडा के फेज -3 स्थित क्लियो काउंटी सोसायटी में उसके घर से गिरफ्तार किया गया। उन्हें बाइक बॉट मामले के अलावा, दादरी पुलिस स्टेशन में दर्ज धोखाधड़ी के दो अन्य मामलों में नामित किया गया है।
संजय भाटी और बाइक टैक्सी फर्म बाइक बॉट के अन्य निदेशकों के खिलाफ कम से कम 10 शिकायतें सामने आई हैं, जिसमें एक विशाल पोंजी घोटाले के लिए ऑर्केस्ट्रेट करने का आरोप है। भाटी ने पिछले सप्ताह एक स्थानीय अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, पुलिस ने कहा कि वे अब फरार निर्देशकों की तलाश में हैं।
भाटी ने बाइक बॉट नाम से पोंजी स्कीम शुरू की, और कुछ महीनों के भीतर कथित तौर पर 2.5 लाख निवेशकों को शुद्ध किया।

Bike Bot Scam

Bike Bot Cheque Given To Investor

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10 नए शिकायतकर्ता, सभी राजस्थान से, पांचों ने आरोप लगाया है कि उन्हें कंपनी द्वारा 3 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाया गया, जिसमें से केवल 9,756 रुपये प्रति माह की एक किश्त उनके खाते में जमा की गई। इन ताजा शिकायतों, पुलिस ने कहा, 30 से अधिक मौजूदा एफआईआर के साथ, भाटी और अन्य के खिलाफ एक विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच की जा रही है।

एसपी (ग्रामीण) को सौंपी गई शिकायत, इन पांच निवेशकों – गोविंद सहाय, ज्योति जोशी, जितेंद्र कुमार, जसवंत यादव और कमल यादव – ने राजेश भारद्वाज, सुनील प्रजापति, दीप्ति बहल, सचिन भाटी, अजय कुमार तिवारी और करणपाल सिंह सहित नौ अन्य लोगों का नाम लिया है। भाटी के अलावा। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जबकि सचिन संजय भाटी का भाई है, दीप्ति उसकी पत्नी है और बाकी उसके सहयोगी हैं।
बाइक बॉट को 2017 में मूल कंपनी, गारवेट इनोवेटिव प्रमोटरों के तहत एक ही नाम के ऐप के साथ एक उद्यम के रूप में मंगाई गई थी। इसने निवेशकों से 65,100 रुपये का एकमुश्त निवेश मांगा, जो 9,765 रुपये का मासिक रिटर्न प्रदान करता है। निवेशकों को बताया गया था कि विभिन्न शहरों में बाइक बॉट से संबद्ध बाइक टैक्सियों द्वारा उत्पन्न राजस्व से आएगा। घोटाले का पता तब चला जब 2018 में बाइक बॉट ने रिटर्न भरना शुरू किया।

भाटी, पूर्व में बीएसपी से जुड़े थे, और बाइक बोट के अन्य अधिकारियों ने आत्मसमर्पण करने से पहले छह महीने तक काम किया था। ठगी के आरोपों के बाद बसपा ने भी खुद को उससे दूर कर लिया।
जब भाटी गुरुवार को एक पुलिस वाहन में एसएसपी के कार्यालय के परिसर में पहुंचे, तो उनके और कुछ निवेशकों के बीच नाराज शब्दों का आदान-प्रदान हुआ। भाटी ने 7 जून को अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था, जबकि पुलिस कंपनी के फ्रेंचाइजी प्रमुख विजय कसाना की गिरफ्तारी के बारे में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
कासना को तब गिरफ्तार किया गया था जब कुछ निवेशकों ने पुलिस को सूचित किया था कि वह एक दुर्घटना से पीड़ित था और उसे मेरठ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

 

इस कंपनी में न केवल बड़े लोगो का बल्कि उन कुछ छोटे व्यापारियों का भी पैसा था जो बूंद बूँद से घड़ा भरते है। घोटाले की कुछ कड़ियों के नाम हम आपको बता देते है, अजय कुमार तिवारी जो कानपूर के रहने वाले है, धर्मेंद्र कुमार चौहान जो मेरठ के मूल निवासी है पवन कुमार जो ग्रेटर नॉएडा के निवासी है। सज्जन कुमार जो की डायरेक्टर्स में से एक थे जिनकी बैल सुप्रीम कोर्ट ने 14 – 02 -2020 को रद्द कर दी साथ ही बाककियो की मंजूर कर दी गयी थी।

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