पंजाब के किसानो को धान की पीआर 128 और पीआर 129 किस्म उगाने की सलाह

कृषि विभाग ने पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की सिफ़ारिशों पर अमल करते हुए किसानों को पीआर 128 और पीआर 129 नॉन बासमती की किस्मों की खेती बाड़ी करने का सुझाव दिया है| इनमें कम पानी का उपयोग होता है और पराली को भी अच्छी तरह से संभाला जा सकता है|

गुरुवार को इस बात से पर्दा उठाते हुए वित्त आयुक्त, विकास और अन्य चीफ सेक्रेटरी, विश्वजीत खन्ना ने कहा है कि यह दोनों ही नई वैरायटी हैं और इनको पहले ही मिलिंग इंडस्ट्री के प्रतिनिधि से मान्यता प्राप्त हो चुकी है जो कि किसानों को चावल की वैरायटी रिलीज करने से पहले बहुत ही जरूरी है|

खन्ना ने यह भी बताया कि यह अत्याधुनिक किस्में पूर्ण चावल रिकवरी की शर्तों को भी पूरा करती हैं| कस्टम मिलिंग पॉलिसी के अनुसार कच्चे चावल की मात्रा 67 प्रतिशत होनी चाहिए  जो कि भारत की सरकार द्वारा निर्धारित की  जाती है| पीएयू द्वारा दी गई जानकारी को साझा करते हुए एटीएस ने बताया कि दोनों पीआर 128 और पीआर 129 किसमें 111 और 108 दिन में ही पक जाती हैं| वही पूसा-44 130 दिन लेती है इसी वजह से इन अत्याधुनिक किस्मों की पानी की खपत कम है|

यह भी याद दिला दिया जाए कि कोरोना की वजह से इस समय मजदूरों की भी कमी चल रही है| पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पहले ही धान की बिजाई और पनीरी लगाने के समय को 10 दिन आगे कर दिया है| धान की बिजाई पहले ही 10 मई से शुरू हो चुकी है और पनीरी लगाने का काम 10 जून से हो शुरू हो जाएगा| ज्यादा जानकारी देते हुए खन्ना ने कहा कि यह ने काफी रिसर्च करने के बाद दो नई चावल की किस्म पीआर 128 और पीआर 129  को तैयार किया है जिसे की स्टेट वैरायटी अप्रूवल कमेटी द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद खेती बाड़ी के लिए पूरे पंजाब में फरवरी 2020 में लाया जा चुका है |

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