सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के पीछे तनाव या विज्ञान

सुशांत सिंह राजपूत एक बेहतरीन एक्टर होने के साथ साथ एक बेहतरीन डांसर, खिलाड़ी और विज्ञान प्रेमी थे। उनके पुस्तक संग्रहालय में बड़ी बड़ी विज्ञान की किताबों को देखकर ही पता चलता है कि विज्ञान की दुनिया से उनको बेहद लगाव था। तो फिर ऐसा क्या हुआ कि इस काबिल और सफल एक्टर को अपने ही हाथों अपनी जान लेनी पड़ी?

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ये अंदेशा लगाया जा रहा है कि सुशांत पिछले कुछ महीनों से तनाव से गुज़र रहे थे। मगर क्या उनके आत्महत्या करने के पीछे सचमुच तनाव था यां इसके पीछे कुछ और राज है?

2002 में अपनी मां के निधन के बाद से ही सुशांत मानो टूट से गये थे। उनका मन अशांत रहने लगा। अपना दिल कहीं और लगाने के लिए और अपने मन की शांति के लिए सुशांत ने अपने सपनों की एक सूची रखनी तयार कर दी।

इस सूची में वह ऐसे सपने लिखने लगे जिनको पूरा करने के लिए इंसान को बहुत मेहनत करनी पड़े। वह एक एक करके इन सपनो को पूरा भी करने लगे मगर उनके अंदर अपनी माँ के जाने से जो जगह खाली रह गयी थी वह भर न पायी। उन्होंने म्यूजिक से लेकर सीतारों तक अपने 50 सपने अपनी सूची में लिखे हुए थे।

सुशांत की मौत के बाद उनका इंस्टाग्राम बायो चर्चा का विषय बना हुआ है जिसमे उन्होंने फेमस एक्सपेरिमेंट ‘फोटोन इन आ ड्यूल स्लिट’ का ज़िक्र किया है। यह एक्सपेरिमेंट तर्क को चुनौती देने वाला था। ये अंदेशा लगाया जा रहा कि वह इसके ज़रिए वह इंसान की दोहरी ज़िन्दगी की यरफ इशारा कर रहे थे यां फिर अपने ही जीवन के दो किरदारों की तरफ इशारा कर रहे थे। पहला जो कि वह असल में थे और दूसरा वह जो उनको बॉलीवुड में टिके रहने के लिए खुदको बनाना पड़ता था।

सुशांत आइंस्टीन के बहुत बड़े प्रशंसक थे। वह चक्र और अध्यात्म में भी यकीन रखते थे। आइंस्टीन की थ्योरी के अनुसार एनर्जी और पदार्थ एक दूसरे में तब्दील हो सकते हैं। ये माना जाता है कि इंसान की उत्पत्ति एनर्जी से हुई है और एक दिन हम उसी एनर्जी में फिरसे बदल जाएंगे।

इंसान जब पैदा होता है तो वह अपनी माँ से यह एनर्जी लेता है और म्रत्यु के पश्चात इंसानी शरीर उसी एनर्जी में तब्दील हो जाता है। दूसरे शब्दों में बोलें तो म्रत्यु के बाद भी इंसान का जीवन होने की संभावना है मगर वह इंसानी रूप में न होकर एनर्जी या ‘रूह’ के रूप में होता है। ये बात कुछ लोगों को तर्कहीन लगेगी मगर गौर करने की बात यह है कि ‘फोटोन इन आ डबल स्लिट’ एक्सपेरिमेंट को भी उस समय तर्कहीन ही माना जाता था।

जैसे कि सब जानते हैं कि अपने आखिरी समय में भी सुशांत अपनी माँ को याद कर रहे थे और शायद उन्ही से दोबारा मुलाकात के लिए उन्होंने यह कदम उठाया हो।

इसे हमारे देश का दुर्भाग्य ही कहेंगे कि संविधान का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया ने सुशांत की मौत को तमाशा बना दिया है। मीडिया टीआरपी के लिए कितना गिर सकता है यह भी हम देख चुके हैं। इस समय पर देश का मीडिया लोगों के सामने सुशांत की मौत का सच लाने की बजाए अपनी तरफ से बनाई गई कहानियों को पेश कर रहा है ताकि कुछ व्यूज और टीआरपी बटोर सके। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

सुशांत सिंह राजपूत के मन में असल में क्या था यह तो अब एक राज़ ही है मगर हम आशा करते हैं कि वह जहां भी होंगे एक बेहतर जगह पर होंगे और अपनी प्यारी माँ के साथ होंगे। सुशांत की आत्मा को भगवान शांति दें।


प्रतीक तिवारी के सौजन्य से

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