सुप्रीम कोर्ट का प्रवासी मजदूरों पर लिया गया फैसला निराशाजनक: बृंदा करात

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) की नेता बृंदा करात ने शुक्रवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा, कोरोना की वजह से चल रहे लॉकडाउन में, प्रवासी कामगारों को उनके घर जाने के लिए निशुल्क सफर मुहैया कराने का फैसला निराशाजनक और चौंका देने वाला है।

करात ने कहा ” सुप्रीम कोर्ट का फैसला निराश करने और चौंका देने वाला है। ये निराशाजनक है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार से प्रवासियों की मदद किये जाने के किसी भी दावे पर कोई प्रशन नहीं उठाया है।”

“यह सीधा सा सवाल है। अगर सरकार ने इतने ही अभूतपूर्व कदम उठाए हैं तो सड़कों पर लाखों मजदूर अपने बच्चों के साथ क्यों हैं? क्यों लाखों महिला कामगर सड़कों पर समान और गोद में बच्चों को उठाकर चलने को मजबूर हैं?” उन्होंने कहा।

करात ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इन दावों पर सवाल करना जरूरी नहीं समझा।

उन्होंने आगे कहा” दूसरी बात ये की सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया है कि,(रेलवे द्वारा सफर जो कि केंद्र सरकार के अधीन आता है)…मजदूरों के रेल से सफर का पूरा खर्च राज्य सरकारों द्वारा उठाया जाएगा न कि केंद्र द्वारा। जहां तक ट्रांसपोर्ट की बात है तो केंद्र सरकार को उनकी सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है। उनपर बस सफर में खाना मुहैया कराने की जिम्मेदारी है।”

करात ने कहा” अगर सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि सफर का पूरा खर्च राज्य सरकारें उठायें तो इस पर कम से कम राज्य सरकारों से बात तो करनी चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार को न कोई नोटिस भेजा न ही उनकी कोई बात सुनी। उन्होंने बस वही किया जो केंद्र सरकार ने कहा।”

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