इंसानों की क्रूरता का शिकार हुई केरल की एक हथिनी, गर्भवती होने की भी पुष्टि

हम इंसान हैं। हमें धरती का सबसे बुद्धिमान प्रजाति माना जाता है। हमारे अंदर अनेक तरह की भावनाएं हैं, जैसे प्यार, दया, लोभ, ईर्ष्या और क्रूरता। मनुष्य का स्वभाव रहा है अपने से कमजोर पर ज़ोर आजमाइश करना और अपनी खोखली जीत पर खुश होना। कुछ ऐसा ही एक वाकया सामने आया भारत के केरल राज्य से।

भूखी हथिनी को इंसानों ने छला

इस बार किसी इंसान ने दूसरे इंसान को परेशान नहीं किया, क्योंकि हो सकता था कि वो दूसरा इंसान बोल पड़े। तो इससे बचने के लिए कुछ लोगों को एक आसान रास्ता सूझता है, किसी बेजुबान जानवर को तकलीफ़ पहुंचाने का। हालंकि, वो कहेंगे कि वो तो बस मस्ती कर रहे थे।
जानवरों के प्रति क्रूरता तो अब जैसे एक चलन हो गया है। इस बार मनुष्य के चंचल दिमाग का शिकार बनी एक गर्भवती हथिनी।
ये हथिनी शायद भूखी थी तो खाने की तलाश में जंगल से निकलकर इंसानों को बस्ती में आ गई। वहां कुछ लोंगो ने उसे एक अनानस खाने को दिया लेकिन उसमें पटाखे भरकर। हथिनी ने जब उसे खाया तो उसके मुंह के अंदर एक विस्फोट सा हुआ। इससे हथिनी बुरी तरह चोटिल हो गई। दर्द से तड़पती हुई वो उसको कम करने का तरीका ढूंढने लगी। गलियों में इधर उधर भागी पर कुछ खास फर्क नहीं पड़ा। इस तरह का विश्वासघात होने के बावजूद उसने किसी भी इंसान को क्षति नहीं पहुंचाई।

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नदी में खड़े खड़े तोड़ दिया दम

आखिरकार हथिनी को कोई रास्ता ना मिलने पर वो वेलियार नदी के तरफ चली गई। उसने अपनी सूंड पानी में डाली ताकि इससे उसके दर्द में कोई कमी हो और मक्खियों से खुद के घाव को बचा सके।
इस घटना ने इस हद तक उसे आतंकित कर दिया कि वो घंटो तक बाहर नहीं निकली। अधिकारियों ने बहुत मशक्कत की, यहां तक कि दूसरे हाथियों का सहारा भी लिया पर उसे बाहर नहीं निकाल पाए। आखिरकार उसने उसी नदी में अपना दम तोड़ दिया।
डाक्टरों की टीम ने पोस्ट मार्टम की रिपोर्ट में बताया कि उसके गर्भ में एक और जान थी, जो बाहर आने से पहले ही, महज़ एक मूर्खता या मज़ाक के कारण, जान गवां बैठी।
हथिनी को आखिरकार अधिकारियों ने नदी से निकला और उसको दूर जंगल में जहां वो बड़ी हुई थी, उसको दफना दिया।

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इस घटना की पूरी जानकारी इंडियन न्यूज नेटवर्क की एक स्टोरी में मिली।

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