भारत द्वारा चीन को झटका: मेक इन इंडिया का बोलबाला

भारतीय स्मार्टफोन निर्माता कंपनी लावा ने उत्पादन केन्द्र को चीन से भारत में स्थानांतरित करने का फ़ैसला लिया है। बिज़नेस स्टैंडर्ड न्यूज़पेपर के अनुसार, कंपनी अपने डिज़ाइन सेंट्रस को भी भारत में शिफ्ट करेगी। यह कदम देश में मोबाइल निर्माताओं के द्वारा सरकार की नई उत्पादन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना के अंतर्गत लिया गया हैं ।  उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि यह निर्माताओं को 6% लागत तक का लाभ देगी, ऐसा पहले कभी भी नहीं हुआ था। इसके अंतर्गत 5 साल के अंतर्गत 800 करोड़ का निवेश किया जाएगा।

लावा के अध्यक्ष और प्रबंध निर्देशक हरिओम राय ने कहा, “हम चीन से भारत में अपने पूरे मोबाइल R&D, डिजाइन और विनिर्माण को स्थानांतरित करने के अवसर का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।  उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन के साथ, विश्व बाजार में हमारी विनिर्माण अक्षमता काफी हद तक ठीक एवं विकसित हो जाएगी इसलिए हम इस बदलाव की योजना बना रहे हैं ।”

भारतीय बाजार में चीनी स्मार्टफोन के प्रसार के बाद से, लावा, माइक्रोमैक्स, कार्बन जैसी कंपनियों ने खुद को काफी हद तक नुकसान पहुंचाया था।  हालांकि, लावा उन कुछ भारतीय खिलाड़ियों में शामिल है, जो दूसरे देशों में जाने और वहां फोन बेचने में सक्षम थे।

कंपनी को हाल ही में अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध से भी लाभ मिला था तथा पिछले साल अचानक से व्यापार में भी वृद्धि हुई थी।  रिपोर्टों के अनुसार, यूएस टेलीकॉस्ट AT&T, टी-मोबाइल और स्प्रिंट ने लावा और माइक्रोमैक्स जैसी कंपनियों को लगभग 2,500 करोड़ के ऑर्डर दिए थे, जिसकी बदौलत दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। भारत को अक्सर चीन के लिए एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में देखा गया हैं। 

वही दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने और COVID-19 संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को सक्षम बनाने के लिए बैठकें कर रहे हैं। हाल ही में ANI की रिपोर्ट के अनुसार, जर्मन फुटवियर ब्रांड वॉन वेलक्स ने चीन से भारत में अपना विनिर्माण आधार शिफ्ट करने का फैसला किया है। इसका उत्पादन यूनिट आगरा में केन्द्रित होगा तथा इसके तहत लगभग 10,000 लोगों को रोज़गार मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यह विकास की घोषणा COVID-19 के इस काल में  आत्मनिर्भर होने के आह्वान करने के कुछ दिन बाद की गयी हैं जिसमें उन्होंने 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की। भारत पर अब अमेरिका जैसे बढ़े देशो की नज़र हैं तथा भारत एक निवेश के केन्द्र के रूप में उभर रहा हैं।

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