भारतीय सेना प्रमुख सुमन गवानी को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया

नई दिल्ली : 2019 में दक्षिण सूडान (UNMISS) में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ महिला शांतिदूत के रूप में कार्य करने वाली भारतीय सेना की मेजर सुमन गवानी को संयुक्त राष्ट्र मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। वह प्रतिष्ठित पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय शांतिदूत बनीं हैं।

संयुक्त राष्ट्र के शांति डिपार्टमेंट ने ट्वीट करते हुए कहा, “दक्षिण सूडान में @unmissmedia के साथ काम करने वाली भारत की मेजर सुमन गवानी को मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवार्ड के लिए बधाई।”

UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के उपलक्ष्य में एक समारोह के दौरान ब्राजील से सुमन गवानी और कमांडर कार्ला मोंटेइरो डी कास्त्रो अरुजो को पुरस्कार दिया।

मेजर सुमन ने इस खुशी के मौके पर कहा कि “दक्षिण सूडान में एक सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में शांति की दिशा में काम करना जीवन बदलने वाला अनुभव रहा है। नीले हेलमेट के नीचे काम करना और मेरी वर्दी पर मेरे देश का झंडा पहनना गर्व की बात है।”

बता दें, मेजर सुमन ने नवंबर 2018 से दिसंबर 2019 तक UNMISS में एक सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में कार्य किया था।

मिशन में रहते हुए, वह मिशन में सैन्य पर्यवेक्षकों के लिए लैंगिक मुद्दों पर ध्यान रखती थीं । रक्षा मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, अधिकारी ने लिंग संतुलन को बनाए रखने के लिए संयुक्त सैन्य गश्ती में भागीदारी को बढ़ावा दिया, भले ही चरम क्षेत्र में कठिनाइयों की स्थिति थी ।

सुमन मिशन में योजना और सैन्य गतिविधि में एक लिंग परिप्रेक्ष्य को एकीकृत करने के लिए दक्षिण सूडान में विभिन्न मिशन टीम साइटों का दौरा किया करती थी।  अधिकारी को नैरोबी में संघर्ष-संबंधित यौन हिंसा (CRSV) पर विशेष प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए चुना गया था और उन्होंने विभिन्न संयुक्त राष्ट्र मंचों में यह प्रदर्शित करने के लिए भाग लिया कि कैसे एक लिंग परिप्रेक्ष्य नागरिकों की रक्षा करने में मदद कर सकता है, विशेषकर संघर्ष-संबंधी यौन हिंसा से ।

दी गई जानकारी के अनुसार “UNMISS फ़ोर्स की पहल का समर्थन करने के अलावा, गवानी ने CRSV से संबंधित पहलुओं को लेकर दक्षिण सूडान की सरकारी सेनाओं को प्रशिक्षित करने का काम किया । अधिकारी ने UNMISS में आयोजित UN पीसकीपर्स डे परेड की भी कमान संभाली, जहाँ पर उसने UNOL, मिलिट्री और सिविलियन के बारह प्रतियोगियों की कमान संभाली थी।”  

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