निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस मे किए कई बड़े ऐलान: जानिए मुख्य बातें

प्रधानमंत्री द्वारा देश को इस संकट की स्थिति से उबारने के लिए 20 लाख करोड रुपए का पैकेज देने का ऐलान किए जाने के चौथे दिन आज निर्मला सीतारमण ने शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस की| इस कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने इस पैकेज की तीसरी किस्त की जानकारी दी| पहली दो किस्तें जहां एमएसएमई  सेक्टर और प्रवासी मजदूरों के नाम रही वहीं आज की किस्त देश के किसानों के लिए रही|

वित्त मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण  के लिए दिए गए इस पैकेज  की तीसरी किस्त के बारे में जानकारी दी| उन्होंने कहा “आज देश का किसान मुसीबत में है और यह राहत पैकेज इन्हीं के लिए है|” सीतारमण ने कहा “प्रधानमंत्री ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी में सुधार और सप्लाई चैन के बारे में जिक्र किया था तो आज हम किसानों पर बात करेंगे| किसान हमेशा से ही मुश्किलों का सामना करते करते आए हैं और उन्होंने सभी किस्म के हालातों में अपने साहस का परिचय दिया है| बता दें कि भारत कई चीजें जैसे कि दूध और जूट का दुनिया भर में नंबर 1 उत्पादक है और वही कपास और गन्ना जैसे उत्पादों का दूसरे नंबर पर सबसे बड़ा उत्पादक है|

आज के पैकेज के 8 एलान देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के बारे में रहे वहीं 3 एलान प्रशासनिक सुधारों के बारे में रहे| तीसरी किस्त में करीब 20 हज़ार करोड रुपए किसान क्रेडिट कार्ड के लिए हैं| किसानों के खातों में 18700 करोड़ जमा कराए जाएंगे| 6400 करोड़ जहां फसलों का बीमा करने के लिए उपयोग होंगे वहीं 17300 करोड रुपए एमएसपी  के लिए दिए जाएंगे| कृषि के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भारत सरकार ने 1 लाख करोड रुपए की राशि देने का फैसला लिया है जिसकी मदद से कोल्ड स्टोरेज एग्रीकल्चर सोसायटी आरपीएफ आदि अच्छे तरीके से चलाए जा सकेंगे|

सीतारमण ने कहा कि माइक्रो साइज फूड एंटरप्राइज को 10 हज़ार करोड़ दिया जाएगा जिसकी वजह से करीब दो लाख खाद्य उद्यमों को फायदा मिलेगा और वह विश्व स्तर की कंपनियां बन पाएंगे| इनमे बिहार के मखाना उत्पादक, कश्मीर के केसर, कर्णाटक के रागी उत्पादक, नॉर्थ ईस्ट के ऑर्गेनिक फूड उत्पादक और तेलंगाना के हल्दी उत्पादकों को बेहद फायदा मिलेगा|

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मछुआरों को नई नौकाएँ दी जाएंगी जिससे 55 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा| सरकार ने समुंद्री और अंतर्देशीय मत्स्य पालन बढ़ाने के लिए 20 हजार करोड़ रुपए वाली मत्स्य संपदा योजना की घोषणा की है|

किस्त में निजी निवेश डेरी प्रोसेसिंग और कैटल फीड निर्यात आदि के लिए भी 15000 करोड का फंड है| नीश प्रोडक्ट जैसे प्लांटों को भी सरकार प्रोत्साहन देगी|

राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 13343 करोड रुपए निवेश किए जाएंगे जिससे कि मवेशियों की बीमारियों से लड़ने में सहायता हो सके उन्हें उचित इलाज मुहैया कराया जा सके| वित्त मंत्री ने हर्बल खेती के बारे में  बात करते हुए कहा कि 2 साल में करीब 10 लाख एकड़ जमीन को कवर किया जाएगा और इसके लिए 4000 करोड रुपए भी आवंटित किए जाएंगे|

मधुमक्खी पालकों के लिए भी अच्छी खबर आई जब वित्त मंत्री ने 500 करोड रुपए की धनराशि मधुमक्खी पालन के लिए जारी की|

वित्त मंत्री ने यह बात स्पष्ट की है कि आत्मनिर्भर बनने का मतलब यह नहीं कि हम खुद को दुनिया से काट लेंगे| आत्मनिर्भरता के इस अभियान का मकसद यह है कि भारत एक ऐसा देश बन सके जो अपनी ताकत पर निर्भर रह सकता है और विश्व स्तर पर भी अपना योगदान दे सकता है| वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि भारत के पास क्षमता है कि वह आत्मनिर्भर बन सकता है और साथ ही साथ पूरी दुनिया की भी मदद कर सकता है| उन्होंने बताया कि “प्रधानमंत्री का आत्मनिर्भर बनने से यह मतलब नहीं कि हम सिर्फ देश के अंदर ही सिमट कर रह जाएं और ना ही ये कि हम खुद को दुनिया से काट लें|

इससे पहले भी प्रवासी मजदूरों के लिए राहत की खबर आई थी जब वित् मंत्री ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि 8 करोड प्रवासी मजदूरों को मुफ़्त अनाज मुहैया कराया जाएगा| इस पर करीब ₹3500 करोड़ खर्च किए जायेंगे| रेहड़ी वालों को 10000 तक का लोन मिलेगा और वही गलियों में सामान बेचने वालों के लिए 5,000 करोड़ की सहायता राशि दी जाएगी| इससे करीब 50 लाख विक्रेताओं को लाभ मिलेगा|

Leave a Reply

%d bloggers like this: