तेलंगाना मुख्यमंत्री ने खेतीबाड़ी विशेषज्ञों के साथ की बैठक, मांगे सुझाव

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव ने कृषि विशेषज्ञ और कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारियों से आज बैठक की जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री को सुझाव दिए कि धान का समर्थन मूल्य मिल सके इसके लिए जरूरी है कि इसकी खेती को 1 साल में 60 65 लाख एकड़ तक ही सीमित रखा जाए|

“कृषि विशेषज्ञों ने राज्य सरकार और किसानों को यह समझाया कि अगर उन्हें फसलों का समर्थन मूल्य लेना है, राज्य में मानसून और रबी फसलों के लिए, तो यह जरूरी है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि धान की खेती को हर साल 60 से 65 लाख एकड़ तक ही सीमित रखा जाए| उन्होंने यह भी साफ किया कि पिछली बारिश के मौसम में मक्की की खेती से उन्हें बिल्कुल भी लाभ नहीं हुआ है| इसकी जगह कपास, जिसकी बाजार में भी बहुत मांग है, उसकी खेती की जानी चाहिए| विशेषज्ञों ने यह सलाह भी दी कि बारिश के मौसम के दौरान अरहर की खेती 10 से 15 लाख एकड़ तक की जानी चाहिए| ” यह संदेश तेलंगाना सीएमओ की तरफ से दिया गया|

कृषि विशेषज्ञों ने जो सलाह दी है उसको खेती बाड़ी की जमीन की जांच, खेती-बाड़ी के तरीके और भारत और दुनिया भर के बाजारों के अध्ययन के बाद दी गई हैं| विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि “अगर धान की खेती इस मात्रा से ज्यादा होगी तो किसानों को उनकी फसलों का सही मूल्य नहीं मिल पाएगा| 65,00,000 एकड़ में पतले और मोटे चावल की किस्मों को शामिल किया गया है| 40,00,000 एकड़ बारिश के मौसम के दौरान और वहीं 25,00,000 एकड़ रबी मौसम के दौरान धान की फसल को उगाया जाएगा|”

यह बताते हुए कि कपास की खेती से किसानों को ज्यादा फ़ायदा है उन्होंने कहा “अगर धान की खेती से 1 एकड़ से ₹30000 का फायदा होता है तो वहीं कपास की खेती से यह फ़ायदा ₹50000 तक हो जाएगा सभी खर्चों को निकालने के बाद| बेहतर है कि राज्य में 65 से 70 लाख एकड़ में कपास की खेती की जाए| कपास की बाजार में बहुत ही ज्यादा मांग है|

इसके अलावा यह सुझाव भी दिए गए कि अरहर को 10 से 15 एकड़ में बारिश के मौसम के दौरान उगाया जाए और मक्की की खेती को रबी मौसम के दौरान ही किया जाए|

राज्य सरकार इन सुझावों पर 2 दिन तक सलाह मशवरा करेगी और फिर विनायक नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा|

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