चीन से निकलने को तैयार बड़ी कंपनियों को आकर्षित करेगा यूपी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक टास्क फोर्स का निर्माण किया है जिसका मुख्य उद्देश्य होगा उन कंपनियों से संपर्क करके उन्हें यूपी में आने का निमंत्रण देना जो कि चीन से बाहर निकलने की फिराक में हैं। उन कम्पनियों से बात करके उन्हें यूपी में अपना कारोबार स्थापित करने के लिए यूपी सरकार प्रेरित करेगी।

यूपी सरकार ने यूएस, दक्षिण कोरिया, जापान, थाईलैंड और यूरोपियन संघ के अन्य सदस्यों से बातचीत शुरू की है ताकि इन देशों को राज्य में निवेश करने के लिए आकर्षित किया जा सके खासकर उन्हें जो कि अपना कारोबार चीन से बाहर ले जाने के बारे में सोच रहे हैं।

निवेश मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक आर्थिक कार्य बल का गठन किया है जो कि उन कम्पनियों पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगा जो कि कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से चीन में अब कारोबार नहीं करना चाहतीं।”

ये मुख्यमंत्री का विश्वास और दूरदृष्टि ही है जो कि इस महामारी को भी एक अवसर में तब्दील करने की क्षमता रखती है। सिंह ने कहा” यूपी सरकार ने यह तय किया है कि उन निवेशकों और देशों को आकर्षित करेंगे जो कि अपना कारोबार चीन से बाहर ले जाने की सोच रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि थाईलैंड के निवेशकों की अक्टूबर में आने की संभावना है वहीं दक्षिण कोरिया की कंपनियों से जल्द मुलाकात होगी।

इसी महीने की शुरुआत में एक वेबिनार हुआ था जिसमे यूएस-भारत के आपसी व्यापार को बढ़ाने की बात की गई थी। इसमें 100 से ज्यादा अमेरिकन कंपनियों जैसे कि माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, यूपीएस, फ़ेडेक्स आदि ने भी भाग लिया था।

ज्यादातर कम्पनियों के बेस चीन में है और वह यूपी में निवेश के अवसरों को अन्वेषण करने के लिए बहुत उत्सुक हैं। ये सभी बहुत ही नामी कम्पनियां हैं और इन सबको यूपी में निवेश के फायदे और नीतियों के बारे में अवगत कराया गया। यूएस का चीन में बहुत ज्यादा निवेश है और दोनों प्रधानमंत्री मोदी और योगी आदित्यनाथ चाहते हैं कि जो कम्पनियां चीन से अपना कारोबार स्थानंतरित करना चाहती हैं वह भारत में आएं खास करके यूपी में।

सिंह और औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना की अगुवाई में टास्क फोर्स ने कोरिया चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री से भी वार्तालाप की है और उन्हें नई औद्योगिक और श्रमिक नीतियों से अवगत कराया है। टास्क फोर्स के कोरियाई कम्पनियों से जल्द मुलाकात के आसार नजर आ रहे हैं। इन कम्पनियों ने दवाईयों, मेडिकल उपकरण और तकनीक में दिलचस्पी दिखाई है।

विदेशी निवेशकों के साथ इन मुलाकातों का मुख्य उद्देश्य उनको राज्य में निवेश अवसरों और नीतियों से रूबरू कराना है। ज्यादातर कम्पनियां ये जानने के लिए उत्सुक थीं के उन्हें यहां क्या क्या सहूलतें मिलेंगी। सरकार ने उन्हें विश्वास दिलाया है कि उनके लिए नीतियां उनकी जरूरतों के हिसाब से बनाई जाएंगी।

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