कांग्रेस द्वारा भेजी गई बसें चढ़ी राजनीति की सूली

कोरोना की वजह से पिछले कई दिनों से प्रवासी मजदूर देश के भिन्न भिन्न क्षेत्रों से पैदल चलकर अपने घर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। इनमे बच्चे बूढ़े और औरतें भी शामिल हैं। कई कई दिन पैदल चलने के बाद यह लोग अभी भी अपने घरों से बहुत दूर हैं और इसको प्रशासन की नाकामी ही कहा जाएगा जिसमे देश का निर्माता ऐसी कड़ी धूप में कई किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर है।

इस बीच सियासी पार्टियों ने भी इस मुद्दे पर अपनी सियासी रोटियां सेंकना शुरू कर दिया है। पिछले दिनीं प्रियंका गांधी वाड्रा ने यूपी सरकार को चिट्ठी लिखकर यह आग्रह किया था कि उनकी पार्टी इस मुश्किल की घड़ी में लोगों की मदद करना चाहती है और इसके लिए वह पैदल चल रहे लोगों को सुरक्षित घर पहुँचाने के लिए 1,000 बसें प्रदान करेंगी। इन बसों को यूपी में आने देने के लिए सरकार उनको अनुमति दे। इसके जवाब में यूपी सरकार ने उन बसों की एक सूची मांगी थी जो कि कांग्रेस पार्टी द्वारा भेजी जाएंगी।

कांग्रेस पार्टी द्वारा इन बसों की लिस्ट जब भेजी गई तो यूपी सरकार ने जांच के बाद दावा किया है कि बसों की इन सूची में 31 ऑटो, 59 स्कूल बसें, 1 ट्रक, 1 एम्बुलेंस, 1 प्राइवेट कार और एक टाटा मैजिक शामिल है। इसके अलावा भेजी गई सूची में 59 बसें ऐसी हैं जिनका फिटनेस सर्टिफिकेट नही है तो वहीं 70 गाड़ियों का कोई भी डेटा मौजूद नहीं है। इसके चलते यूपी सरकार ने इन बसों को राज्य में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी है और अब ये सारी बसें यूपी की सीमा पर ही खड़ी हैं।

इस बात पर यूपी के कांग्रेस अध्यक्ष अजय सिंह लल्लू बाकी मौजूद कार्यकर्ताओं के साथ यूपी राजस्थान बॉर्डर पर धरने पर बैठ गए। पुलिस द्वारा उनको हटाया गया और अजय सिंह को हिरासत में ले लिया गया है। ये भी बता दें कि जहां कांग्रेस पार्टी ये दावा कर रही है कि उन्होंने बसें मुहैया करा दी हैं और अब यूपी सरकार इस बात पर सियासत करते हुए उन्हें अनुमति नहीं दे रही है वहीं मौके पर मौजूद बसों की संख्या 1,000 से काफी कम नज़र आ रही है।

बहरहाल दोनो पार्टियों के बीच सियासी लड़ाई जारी है और कागज़ी करवाई चल रही है। दोनों पक्ष एक दूसरे के कदमों को सियासत से प्रेरित बताते हैं मगर इस लड़ाई में भी नुकसान गरीब का हो रहा है। देश में महामारी का दौर है शायद इसीलिए गरीब मजदूर सड़कों पर चलने को मजबूर है, अगर चुनाव का माहौल होता तो अब तक शायद अपने घर पहुंच चुका होता।

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