अर्थवयवस्था ठीक करने के लिए लोगो के हाथ में पैसा दे सरकार – अभिजीत बनर्जी

अर्थवयवस्था ठीक करने के लिए लोगो के हाथ में पैसा दे सरकार – अभिजीत बनर्जी

IMG 20200506 125055

मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी से अर्थवयवस्था के मुद्दे पे बातचीत की। इस चर्चा में दोनों लोगो ने corona आपदा के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था की चुनौतियों पर चर्चा की। दोनों लोगो ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की मदद से इस मुद्दे पे बात की। पूरी चर्चा में अभिजीत बनर्जी ने अर्थव्यवस्था ठीक करने के लिए एक ही बात पर बल दिया कि सरकार लोगो के हाथ में पैसा पहुंचाए।

बनर्जी ने कहा कि लोगों के हाथों में नकदी डालना पोस्ट लॉकडाउन के बाद अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का सबसे अच्छा तरीका होगा। उन्होंने कहा कि सरकार को अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए एक बड़े पर्याप्त प्रोत्साहन पैकेज के साथ बाहर आना चाहिए।

बनर्जी के हिसाब से लोगो की खरीद छमता में कोई कमी नहीं आनी चाहिए और वो बनी रहनी चाहिए तभी वो लॉक डॉउन के बाद पैसा खर्च कर सकेंगे और यह तभी संभव है जब केंद्र सरकार लोगो तक पैसा पहुंचाए और उन्हें इसका भरोसा दिलाएं की लॉक डॉउन के बाद भी आपके हाथ में पर्याप्त पैसा होगा और आप खर्च कर सकेंगे। बनर्जी के हिसाब से लॉक डॉउन के बाद अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने का यही एकमात्र तरीका है।

बनर्जी मंगलवार को  कांग्रेस के सोशल मीडिया हैंडल पर प्रसारित संवादों की एक श्रृंखला के हिस्से के रूप में राहुल गांधी के साथ COVID-19 महामारी के आर्थिक प्रभाव पर विचार-विमर्श कर रहे थे।

प्रसिद्ध नोबल विजेता अर्थशास्त्री ने कहा, “हमने वास्तव में एक बड़े प्रोत्साहन पैकेज पर फैसला नहीं किया है। हम अभी भी जीडीपी के 1% के बारे में बात कर रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका 10% जीडीपी के लिए चला गया है”। बनर्जी ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को खाद्य वितरण की समस्या से निपटने के लिए लोगों को अस्थायी राशन कार्ड सौंपने चाहिए।

बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने बनर्जी से सवाल पूछा कि क्या न्याय की तर्ज़ पर लोगों को रकम दी जा सकती है?

बिनेर्जी ने सकारात्मक जवाब में कहा कि यह बहुत अच्छा तरीका होगा लेकिन सरकार को केवल सबसे गरीब तक ही सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा “मैं निम्न वर्ग की 60% आबादी की बात करूंगा। अगर सरकार उन्हें कुछ पैसा देती हैं तो  मेरे विचार में कुछ भी बुरा नहीं होगा। अगर हमने उन्हें पैसा दिया, तो उनमें से कुछ को इसकी आवश्यकता नहीं हो सकती, ठीक है वे इसे खर्च करेंगे। यदि वे खर्च करते हैं तो यह अर्थव्यवस्था को ठीक करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम होगा।

 

 

 

 

Leave a Reply

%d bloggers like this: